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Breaking Decision! हिमाचल में पंचायत चुनाव स्थगन को लेकर विपक्ष ने साधा निशाना
शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव फिलहाल टल सकते हैं। प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत आदेश जारी करते हुए कहा है कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव पूरे राज्य में उचित सड़क संपर्क बहाल होने के बाद ही आयोजित किए जाएंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय जनता की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है ताकि मतदाताओं और चुनाव कर्मियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
सरकार ने दिया तर्क: आपदा के कारण राज्य बुरी तरह प्रभावित
सरकार द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि मानसून 2025 ने हिमाचल प्रदेश को गंभीर क्षति पहुंचाई है। इस दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में 47 बादल फटने, 98 अचानक आई बाढ़ और 148 बड़े भूस्खलन की घटनाएं दर्ज की गईं। इन आपदाओं में 270 लोगों की जान चली गई, जबकि सड़क दुर्घटनाओं में 198 लोगों की मृत्यु हुई।
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 1817 घर पूरी तरह से नष्ट और 8323 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त पाए गए हैं। कुल मिलाकर 5,426 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान दर्ज किया गया है, जबकि कई जिलों में क्षति का आकलन अभी बाकी है।
राज्य कार्यकारी समिति के अध्यक्ष द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि जब तक सड़कें, पुल और ग्रामीण संपर्क मार्ग पूरी तरह से बहाल नहीं हो जाते, तब तक चुनाव करवाना व्यावहारिक नहीं है। सरकार का कहना है कि मतदाताओं की सुरक्षा और मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता के लिए यह कदम आवश्यक है।
विपक्ष का पलटवार: हार के डर से टाल रही है सरकार चुनाव
हालांकि, इस निर्णय पर विपक्ष और सोशल मीडिया पर सरकार को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स और विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार अपनी संभावित हार के डर से चुनाव टालने का बहाना बना रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और उनकी सरकार जनता का सामना करने से डर रही है। उन्होंने कहा, सरकार को पहले से ही पता है कि पंचायत चुनावों में कांग्रेस की करारी हार तय है। इसी कारण प्राकृतिक आपदा की आड़ लेकर चुनाव स्थगित कर दिए गए हैं।
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले नगर निगम और निकाय चुनावों से दूरी बनाई और अब पंचायत चुनाव भी टाल दिए हैं। उन्होंने कहा कि आपदा के नाम पर जिला उपायुक्तों से पत्र लिखवाकर चुनाव स्थगित करने की स्क्रिप्ट पहले से तैयार की गई थी। साथ ही उन्होंने सरकार पर आपदा प्रभावितों की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया। जिस आपदा के नाम पर सरकार चुनाव टाल रही है, उन्हीं प्रभावितों को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।
उपायुक्तों ने सचिव को लिखा पत्र
इस बीच, मंडी, कांगड़ा, हमीरपुर और शिमला जिलों के उपायुक्तों ने पंचायती राज सचिव को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि राज्य में सड़क बहाली कार्य पूर्ण होने तक चुनाव टाल दिए जाएं। उन्होंने कहा कि मतदाताओं, चुनाव अधिकारियों और सामग्री की सुरक्षा सर्वोपरि है, और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बहाल होने के बाद ही पंचायत चुनाव करवाना उचित होगा।
उपायुक्तों ने यह भी उल्लेख किया कि आपदा के बाद कई ग्रामीण मार्ग अब भी बंद हैं और मतदान केंद्रों तक पहुंचना मुश्किल है। इसलिए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत आदेश जारी कर चुनावों को स्थगित करना तर्कसंगत कदम है।
निष्कर्ष
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों का स्थगन अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। जहां सरकार इसे जनता की सुरक्षा से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष इसे “राजनीतिक पलायन” बता रहा है। अब देखना यह होगा कि आपदा प्रबंधन के नाम पर स्थगित हुए चुनाव कब तक करवाए जाते हैं और इस निर्णय का राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
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