कालाअंब में सड़क हादसा: 12 वर्षीय छात्रा की मौके पर मौत
हृदयविदारक हादसे की दर्दनाक तस्वीर
कालाअंब (अंबाला)। शुक्रवार सुबह कालाअंब में सड़क हादसा पेश आया, जिसे देखकर हर किसी का दिल दहल उठा। इस हादसे में सेंट फ्रांसिस स्कूल की 12 वर्षीय छात्रा आराध्या की मौके पर ही मौत हो गई। जानकारी के अनुसार छात्रा रोज की तरह अपने घर से स्कूल के लिए निकली थी। जैसे ही वह कालाअंब–नारायणगढ़ नेशनल हाईवे-07 (NH-07) पार कर रही थी, तभी तेज रफ्तार ट्रक (नंबर RJ 11 GC 3090) चपेट में आ गई।
कालाअंब में सड़क हादसा इतना भयावह था कि इसने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। आसपास मौजूद लोग तुरंत घटनास्थल पर इकट्ठा हो गए और गुस्से में हाईवे पर जाम लगा दिया।
स्थानीय लोगों का आक्रोश
कालाअंब में सड़क हादसा होने के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन और पुलिस के खिलाफ कड़ा विरोध जताया। लोगों का कहना है कि कालाअंब में सड़क हादसा प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है।
यहां सड़क सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम नहीं हैं।
हाईवे पर ट्रकों और अन्य वाहनों की तेज रफ्तार पर कोई अंकुश नहीं है।
पैदल चलने वालों और स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग की सुविधा तक उपलब्ध नहीं है।
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लोगों ने मांग की कि तुरंत सड़क पर बैरीकेड्स लगाए जाएं और पैदल चलने वालों के लिए एलिवेटेड क्रॉसिंग बनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाएं दोबारा न हों।
पुलिस की कार्रवाई
कालाअंब में सड़क हादसा होने की सूचना मिलते ही हरियाणा पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रक चालक को हिरासत में ले लिया। पुलिस चौकी प्रभारी तलविंद्र सैनी ने बताया कि चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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गुस्साए लोगों को शांत कराने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। हाईवे पर लंबा जाम लग गया था, जिसे पुलिस ने कड़ी मेहनत के बाद खुलवाया।
कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन की घोषणा
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने घोषणा की है कि शनिवार को कालाअंब चौक से सेंट फ्रांसिस स्कूल तक कैंडल मार्च निकाला जाएगा। इस दौरान स्कूली बच्चों की सुरक्षा और सड़क पर आवश्यक इंतजाम करने की मांग प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर की जाएगी।
कालाअंब सड़क हादसा क्यों बार-बार हो रहा है?
यह पहली बार नहीं है कि कालाअंब सड़क हादसा हुआ हो। स्थानीय लोग लंबे समय से NH-07 पर सुरक्षा इंतजामों की कमी की शिकायत करते आ रहे हैं।
मुख्य कारण:
हाईवे पर तेज रफ्तार ट्रकों का आवागमन।
पैदल पारपथ (Pedestrian Crossing) की सुविधा का न होना।
स्कूल और आबादी के पास स्पीड ब्रेकर व सिग्नल का अभाव।
ट्रैफिक पुलिस की नियमित गश्त का न होना।
यदि इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में कालाअंब सड़क हादसों की संख्या और बढ़ सकती है।
प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी
लोगों का मानना है कि प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए।
बैरीकेड्स और स्पीड ब्रेकर लगाए जाएं।
एलिवेटेड पैदल पारपथ (Foot Over Bridge) बनाया जाए।
ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जाए।
स्कूलों के आसपास सड़क सुरक्षा ज़ोन बनाया जाए।
ऐसे कदम उठाए जाने से भविष्य में कालाअंब सड़क हादसों को रोका जा सकता है और स्कूली बच्चों की जान सुरक्षित हो सकती है।
सोशल मीडिया पर गुस्सा
इस हादसे के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा साफ देखा जा सकता है। स्थानीय लोगों ने #KalaambSadakHadsa और #RoadSafety जैसे हैशटैग के साथ प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया। कई लोगों ने लिखा कि “एक मासूम की जान जाने के बाद भी अगर सरकार नहीं जागेगी तो कब जागेगी?”
निष्कर्ष
यह कालाअंब सड़क हादसा सिर्फ एक बच्ची की मौत की खबर नहीं है, बल्कि एक बड़ा सबक है कि सड़क सुरक्षा को नज़रअंदाज़ करने की कीमत कितनी भयंकर हो सकती है। अब समय आ गया है कि प्रशासन और सरकार मिलकर ठोस कदम उठाएं, ताकि भविष्य में कोई और मासूम अपनी जान न गंवाएं।
